मंगलवार, 31 मार्च 2026

जय श्रीराम के देश 85वें स्तर पर!!

https://www.sarita.in/editorial/bangladesh-elections-2026

 

सरिता प्रवाह, संपादकीय

जनवरी, द्वीतीय, 2026

भारतीय पासपोर्ट

पिछले साल के मुकाबले भारतीय पासपोर्ट की पौवर यानी कितने देश बिना वीजा के भारतीय पासपोर्टधारकों को अपने देश में घुसने देते हैं, 5 स्तर कम हो कर अब 85वें स्तर पर है. दुनिया के 196 देशों में से केवल 57 देश भारतीय नागरिकों को सुरक्षित समझते हैं जहां वीजा की जरूरत नहीं है......



मेरी टिप्पणी हमने आज का अपना देश अंग्रेजों से पाया. अंग्रेजों तो अतिअल्पसंख्यक थे। उन्हीं की छोड़ी खाली जगहों पर हमारे, उन्ही की बदौलत बने नेते, गांधी, नेहरू, अंबेडकर... सारे उन्ही की बदौलत थे, अपना योगदान करने लगें. अंग्रेज अतिअल्पसंख्यक थे तो भारतीय नेताओं को भी इसी हैसियत हासिल हुई.  यहां पर नेताओं को कोई गिला शिक्वा नहीं है. वे अपने खुशी खुशी नियुक्त होते हैं और सारी सहुलियत पाते हैं.  जब चाहे अपनी आमदनी बड़ाचढा कर बटोर रहें हैं. जितना बड़ा देश, इतनाही बड़ा समुद्र, लूटने के लिए समुद्र.

भारत का अहम मतलब ही यह होता है कि एक बाजू अतिअल्पसंख्यक नेते  और दूसरी और ढेर सारी प्रजा जिन्की हालात बदले न बदले कुछ फरक नहीं पड़ता. उलटा यह कह सकतें हैं कि अंग्रेजों से आज़ादी का तो जाने उन्हें फटका सा ही बैठा, यानि कि बहुत सारे को. जो बेंगाल से तालूक रखते थें, सिन्ध, पंजाब, पेशावर से ताअलूक रखते थें. उन्हें.  लहू के रंग गांधी के हात से निकले नहीं निकलेंगे. उन्हों ने श्रेय जयश्री राम के नारे ज्यादा ही लगाये.

लेकिन, हां, आज के वक़्त तक नेताओं का बोलबाला जारी रहा है. साथ साथ में और लोगों के और क्षेत्रों मे दर्जा पाने वालें का. यहां भी अतिअप्लसंख्यक को ही प्राधान्य है. चाहे कितना करो, आपका चुनाव भारतीय टीममें 140 करोड़ में से होना है.  हा एक बार चून लिए गए तो माल ही माल है, जैसे नेताओं के पास सम्मिलित हो पाता है.

इस अतिअल्पसंख्यक दुनिया को ही तवज्जू दें तो भारत कहीं बेहतर अंक हासिल कर सकता है लेकिल बाहरी देसों के लोगों को, परिक्षित करने वालें लोगों को,  नेताओं के खंदे के पीछे भी झांकने की बूरी आदत बनी हुई है. महा अफसोस!

5.49 p.m. 31-03-2026


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें