भारत के खिलाफ
बांग्लादेश में षड्यंत्र
चुनाव के पहले आग उगल रहे कट्टरपंथी, भारत को तोड़ने के ख्वाबों का खुलेआम इजहार
डॉ. विजय दर्डा
मेरी टिप्पणी - लेख में लिखा है: 'जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आजमी बार-बार दोहराता है कि बांग्लादेश में शांति तभी आएगी जब भारत टुकड़ों में बंटेगा, नेशनल सिटिजन पार्टी का चीफ ऑर्गेनाइजर (दक्षिण), हसनत अब्दुल्लाह कहता है कि बांग्लादेश भारत के सेवेन सिस्टर्स (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा) को भारत से अलग कर देगा.'
इस में निहित
यह है कि भारत
को हमेशा
के लिए
उसकी एकता
और अखंडता के बारे में
फिक्र रहती
है जो कि बांग्लादेश को इस बात
की चिंता
नहीं. कहते हैं
कि कांच
के घर वाले पत्थर
नहीं फेंकते. बांग्लादेश यहां पर निसंकोच पत्थर
फैंक सकता
है यह बांग्लादेश ने बेखूबी जान
लिया है.
ऐसा
क्यों है कि जो चीज़ भारत
को लागू
होती है,
बांग्लादेश को नहीं? यानी कि बांग्लादेश और भारत के बीच कभी
दोस्ती नहीं
हो सकती.
दोस्ती बराबरों में होती है.
और बराबरी करनी हो तो भारत टुकड़ों में बंटना चाहीए,
और फिर
जैसे कि ‘जनरल
अब्दुल्लाहिल अमान
आजमी बार-बार दोहराता है कि बांग्लादेश में शांति तभी
आएगी जब भारत टुकड़ों में बंटेगा’.
और बाकी सब तो ठीक,
जहां पर हिंदू हिंदू
वाली बात
बनती है. जहां वह बात इतनी
नहीं बनती
यानी कि सात बहनों वाले प्रांतों में, अलगाववाद की बात पर आस बनाये
बैठना अयोग्य नहीं है.
प्रश्न यह है कि ऐसी परिस्थिती क्यों है? अंग्रेज चले
गये. वे अपने जीवन
निहायत ही चैन के साथ जी रहे हैं. साम्राज्य वाला बोझ से वे कब से रिहा
हो चुके
हैं. इतना ही नहीं जो कुछ भी लगे हुए
हैं यानी कि स्कोटलेंड इत्यादी को पूरी रजामंदी है की अपना
कारोबार खुद
संभाले अगर
वह चाहे.
यहां
पर भारत
के हाथ में साम्राज्य की पकड़ थमा कर गए. और देखलो, उससे
कितना भुगतना पड़ रहा है!
कारण सिर्फ
इतना की हम पकड़
किसी हिसाब
से ढीली
करना नहीं
चाहते!
अगर इस पकड़ को ठीली कर दी जाय और कहा जाय कि आखिर में हम सब एक से ही है, बांग्लादेश हो या आसाम. तो फिर टुकड़ो में बांटने वाली बात ही न रहेगी, न कोई ख़ास बड़ा कि न कोई ख़ास छोटा होगा. और जैसे कि बताया गया है कि तभी बांग्लादेश में शांती आएगी, या तो कम से कम इस कारण से तो शांती नहीं रोकी जाएगी!
8:26 p.m. 03-01-2026
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